Friday, January 23, 2009
मेरे घर जरूर आईयेगा
बाबूजी ने एक मंत्र दिया हैं- रे मन तू सबसे छोटा. मैं तो सबसे छोटा हूँ. एक पत्रकार और जीवन भर सीखने कि ख्वाहिश रखता हूँ. सबसे कुछ न कुछ सीख लेना ही मेरी जिद हैं और इसीलिए सबसे कहता हूँ कि मेरे घर जरूर आना.वशुधैव कुटुम्बकम, जीओ और जीने दो, कल फिर मिलेंगे... पाठ का पन्ना उड़ने लगा हैं, वैश्वीकरण, विश्व एक कुटुंब हैं जैसी बातें करने वाले अपने ही कुटुंब को, परिवार को नही संभाल पा रहे हैं. हर घड़ी, हर पल, घर-परिवार और दिल टूट रहे हैं. हम सभी को माँ कि ममता, गंगा की गंभीरता और भगवान् राम के त्याग को जेहन में उतारना होगा. सुधार कि सबसे ज्यादा जरुरत मैंने स्वयं में समझता हूँ. मुझे तो मौन में ही मस्ती मिलती हैं. मौन रहकर ही शान्ति का सुख पा लेता हूँ. ये मानता हूँ कि विवेक से जीवन में आनंद लाया जा सकता हैं.''कभी नाउम्मीद न हुआ जाएलगा कर हौसला-ऐ-उम्मीद का परए पाखी चलो आज आकाश से मिल आया जाए''
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